हिंदी साहित्य का आरंभ

 

परिचय

हिंदी साहित्य का आरंभ किसी एक निश्चित तिथि से नहीं माना जा सकता। सामान्यतः इसका प्रारंभ लगभग सन् 1000 ई. के आसपास माना जाता है। पिछले लगभग एक हजार वर्षों में हिंदी साहित्य का निरंतर विकास हुआ है। समय के साथ इसकी भाषा, विषय-वस्तु, शैली तथा साहित्यिक प्रवृत्तियों में अनेक परिवर्तन हुए। इन्हीं परिवर्तनों के आधार पर विद्वानों ने हिंदी साहित्य को विभिन्न कालों में विभाजित किया है।

यद्यपि हिंदी साहित्य के काल-विभाजन के संबंध में अनेक विद्वानों के मत हैं, परंतु आचार्य रामचंद्र शुक्ल का काल-विभाजन सर्वाधिक प्रामाणिक और व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।


हिंदी साहित्य का काल-विभाजन (आचार्य रामचंद्र शुक्ल)

साहित्यिक कालविक्रम संवत्ईस्वी सन्
आदिकाल (वीरगाथाकाल)1050–1375993–1318 ई.
पूर्वमध्यकाल (भक्तिकाल)1375–17001318–1643 ई.
उत्तरमध्यकाल (रीतिकाल)1700–19001643–1843 ई.
आधुनिक काल (गद्यकाल)1900 से अब तक1843 ई. से वर्तमान

आदिकाल (वीरगाथाकाल)

समय : संवत् 1050–1375 (993–1318 ई.)

परिचय

आदिकाल हिंदी साहित्य के विकास का प्रारंभिक काल माना जाता है। इससे पहले साहित्य की प्रमुख भाषा अपभ्रंश थी। लगभग आठवीं शताब्दी से अपभ्रंश साहित्य उपलब्ध होने लगता है। प्रसिद्ध विद्वान चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने अपभ्रंश को "पुरानी हिंदी" कहा है।

हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल को वास्तविक रूप से हिंदी साहित्य की प्रारंभिक अवस्था माना जाता है।


आदिकाल का साहित्य

इस काल में मुख्यतः तीन प्रकार का साहित्य लिखा गया—

  1. धार्मिक काव्य
  2. वीरगाथा काव्य
  3. स्वतंत्र काव्य

1. धार्मिक काव्य

आदिकाल में अनेक धार्मिक सम्प्रदाय सक्रिय थे, जिनमें विशेष रूप से—

  • सिद्ध
  • नाथ
  • जैन

परंपराएँ प्रमुख थीं।

इन सम्प्रदायों के कवियों ने साहित्य के माध्यम से अपने धार्मिक सिद्धांतों एवं आध्यात्मिक विचारों का प्रचार किया। इस साहित्य में काव्य-सौंदर्य की अपेक्षा धार्मिक शिक्षा का महत्व अधिक है।

इनकी प्रमुख रचनाएँ दोहा, चरित काव्य तथा चार्यापदों के रूप में प्राप्त होती हैं।


प्रमुख धार्मिक कवि एवं उनकी रचनाएँ

सम्प्रदायकविप्रमुख रचना
सिद्धसरहपादोहाकोश
जैनस्वयंभूपउम चरिउ
जैनमेरुतुंगप्रबंध चिंतामणि
जैनहेमचंद्रप्राकृत व्याकरण
नाथगोरखनाथगोरखबानी

जैन काव्य की प्रमुख विशेषताएँ

  • जैन धर्म के सिद्धांतों पर आधारित साहित्य।
  • जैन तीर्थंकरों एवं महापुरुषों के जीवन पर चरित-काव्य की रचना।
  • प्रमुख चरित ग्रंथ—
    • पउम चरिउ
    • जसहर चरिउ
    • करकंडु चरिउ
    • भविसयत कहा
  • व्याकरण ग्रंथों की रचना।
  • चौपाई छंद एवं कड़वक बंध का विकास।
  • हिंदी का प्रथम बारहमासा वर्णन जैन साहित्य में मिलता है।

2. वीरगाथा काव्य

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस काल में भारत में कोई शक्तिशाली केंद्रीय शासन नहीं था। देश अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था। प्रत्येक राजा अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था, जिसके कारण निरंतर युद्ध होते रहते थे।

दरबारी कवियों ने अपने आश्रयदाता राजाओं की वीरता, युद्ध-कौशल तथा पराक्रम का वर्णन किया। इसी कारण इस साहित्य को वीरगाथा काव्य कहा गया।


प्रमुख वीरगाथा ग्रंथ

कविरचना
चंदबरदाईपृथ्वीराज रासो
जगनिकपरमाल रासो
नरपति नाल्हबीसलदेव रासो

वीरगाथा काव्य की विशेषताएँ

  • वीर रस की प्रधानता।
  • युद्ध एवं पराक्रम का वर्णन।
  • राजाओं की प्रशस्ति।
  • ऐतिहासिक एवं अर्ध-ऐतिहासिक घटनाओं का चित्रण।
  • राष्ट्रीय गौरव एवं स्वाभिमान की भावना।

3. स्वतंत्र काव्य

जो कवि न तो धार्मिक साहित्य से जुड़े थे और न ही वीरगाथा परंपरा से, उन्हें स्वतंत्र कवि कहा जाता है।


विद्यापति

समय : 14वीं शताब्दी

प्रमुख रचनाएँ

  • कीर्तिलता
  • कीर्तिपताका
  • पदावली

विशेषताएँ

  • पदावली में राधा-कृष्ण प्रेम का अत्यंत मधुर एवं मानवीय चित्रण।
  • प्रेम को मानवीय भावनाओं के रूप में प्रस्तुत किया।
  • श्रृंगार रस की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति।

अमीर खुसरो

समय : 14वीं शताब्दी

प्रमुख रचनाएँ

  • पहेलियाँ
  • मुकरियाँ
  • दो सुखने

विशेषताएँ

  • फारसी एवं हिंदी दोनों भाषाओं के महान कवि।
  • हिंदवी भाषा के प्रारंभिक प्रयोगकर्ता।
  • आधुनिक हिंदी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान।

अन्य प्रमुख कवि

कविप्रमुख रचना
अब्दुल रहमानसंदेश रासक
रोडाराउड बेलि
लक्ष्मीधरप्राकृत पैंगलम्

आदिकाल की प्रमुख विशेषताएँ

✅ वीर रस की प्रधानता।

✅ राजाश्रित साहित्य की परंपरा।

✅ धार्मिक साहित्य का व्यापक विकास।

✅ जैन, सिद्ध एवं नाथ सम्प्रदाय का प्रभाव।

✅ चरित, दोहा एवं पद जैसे नए काव्य रूपों का विकास।

✅ अपभ्रंश, अवहट्ट, डिंगल एवं पिंगल मिश्रित भाषा का प्रयोग।

✅ वीर रस के साथ श्रृंगार रस की भी रचनाएँ।

✅ अमीर खुसरो की रचनाओं में आधुनिक हिंदी का प्रारंभिक स्वरूप दिखाई देता है।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • हिंदी साहित्य का आरंभ : लगभग 1000 ई.
  • सर्वाधिक मान्य काल-विभाजन : आचार्य रामचंद्र शुक्ल
  • आदिकाल का दूसरा नाम : वीरगाथाकाल
  • अपभ्रंश को "पुरानी हिंदी" कहने वाले : चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • वीरगाथा काव्य के प्रमुख कवि : चंदबरदाई, जगनिक, नरपति नाल्ह
  • जैन काव्य की प्रमुख रचना : पउम चरिउ
  • नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख कवि : गोरखनाथ
  • सिद्ध सम्प्रदाय के प्रमुख कवि : सरहपा
  • हिंदी का प्रथम बारहमासा : जैन साहित्य
  • आधुनिक हिंदी का प्रारंभिक रूप : अमीर खुसरो की हिंदवी रचनाएँ

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