'दूसरा देवदास' ममता कालिया की एक रोचक और संवेदनशील कहानी है, जिसमें युवा मन की सहज प्रेमानुभूति, संकोच, आकर्षण और भावनात्मक उथल-पुथल का सुंदर चित्रण किया गया है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
- हर की पौड़ी पर आरती का दृश्य कैसा था?
- संभव हरिद्वार क्यों आया था?
- मंगल पंडा ने संभव से क्या कहा?
- पुजारी ने संभव और युवती को कौन-सा आशीर्वाद दिया?
- लड़की का नाम क्या था?
- मन्नू का पारो से क्या संबंध था?
- संभव को युवती पहली बार कहाँ दिखाई दी?
- मंसा देवी मंदिर तक पहुँचने के लिए संभव ने किस साधन का उपयोग किया?
- संभव किस परीक्षा की तैयारी कर रहा था?
- कहानी का शीर्षक "दूसरा देवदास" क्यों रखा गया है?
लघु उत्तरीय प्रश्न
- हर की पौड़ी की संध्या आरती का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
- पुजारी द्वारा दिए गए आशीर्वाद से संभव और युवती क्यों संकोच में पड़ गए?
- संभव के मन में युवती के प्रति आकर्षण कैसे उत्पन्न हुआ?
- बैसाखी के अवसर पर हरिद्वार की भीड़ की क्या विशेषताएँ थीं?
- मंसा देवी मंदिर में मनोकामना की गाँठ बाँधने का क्या सांकेतिक महत्व है?
- संभव के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
- नानी और संभव के संबंधों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
- कहानी में हरिद्वार के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का चित्रण कैसे हुआ है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- "दूसरा देवदास" कहानी में प्रेम की प्रथम अनुभूति का चित्रण कीजिए।
- हरिद्वार के परिवेश का कहानी में क्या महत्व है? स्पष्ट कीजिए।
- संभव के मनोभावों का विश्लेषण कीजिए।
- कहानी के शीर्षक "दूसरा देवदास" की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
- ममता कालिया ने कहानी में आधुनिक युवा मनोविज्ञान को किस प्रकार प्रस्तुत किया है?
- धार्मिक आस्था और मानवीय भावनाओं के समन्वय पर टिप्पणी कीजिए।
महत्त्वपूर्ण चरित्र-चित्रण
- संभव का चरित्र-चित्रण।
- पारो का चरित्र-चित्रण।
- नानी का चरित्र-चित्रण।
- मन्नू का चरित्र-चित्रण।
परीक्षा हेतु संभावित उद्धरण-व्याख्या
- "सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना।"
- "मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है।"
- "इस भीड़ में एकसूत्रता थी।"
