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रविवार, 14 जून 2026

उसकी माँ

  


लेखक : पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’

सारांश

‘उसकी माँ’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। इसमें एक क्रांतिकारी युवक लाल, उसकी त्यागमयी माँ जानकी, और एक जमींदार कथावाचक के माध्यम से देशभक्ति, मातृत्व और औपनिवेशिक शासन की क्रूरता का चित्रण किया गया है।

कहानी का आरंभ तब होता है जब पुलिस सुपरिंटेंडेंट कथावाचक से लाल के बारे में पूछताछ करने आता है। कथावाचक को पता चलता है कि सरकार लाल की गतिविधियों पर नज़र रख रही है। लाल एक कॉलेज छात्र है, जो देश की पराधीनता से दुखी है और अंग्रेज़ी शासन का विरोध करता है। उसकी माँ जानकी एक सरल, भोली और ममतामयी स्त्री है, जिसे अपने बेटे और उसके मित्रों पर गर्व है। वह उन सभी युवकों को अपने बच्चों की तरह प्यार करती है।

लाल और उसके साथी देश की स्वतंत्रता के लिए क्रांतिकारी विचार रखते हैं। वे अंग्रेज़ी शासन को अन्यायपूर्ण और शोषणकारी मानते हैं। धीरे-धीरे पुलिस को उनके क्रांतिकारी कार्यों का संदेह होता है। एक दिन पुलिस छापा मारकर लाल और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लेती है। उन पर षड्यंत्र, विद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं।

जानकी को विश्वास नहीं होता कि उसका बेटा अपराधी हो सकता है। वह अदालतों, वकीलों और जेलों के चक्कर लगाती रहती है। अपने बर्तन, गहने और घर का सामान बेचकर वह जेल में बंद युवकों के लिए भोजन पहुँचाती है। वह उन्हें अपने बेटे समान समझती है और अंत तक उनके निर्दोष होने की आशा बनाए रखती है।

लंबे मुकदमे के बाद अदालत लाल और उसके कुछ साथियों को फाँसी तथा अन्य को कठोर कारावास की सज़ा सुनाती है। सज़ा सुनाए जाने पर भी लाल और उसके साथी विचलित नहीं होते। वे हँसते हुए अपनी माँ को सांत्वना देते हैं और स्वतंत्रता के आदर्शों के लिए बलिदान को गौरवपूर्ण मानते हैं।

फाँसी से पहले लाल अपनी माँ को एक अंतिम पत्र लिखता है, जिसमें वह मृत्यु को एक नए मिलन और स्वतंत्रता की ओर यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है। यह पत्र पढ़कर भी जानकी स्तब्ध रह जाती है। उसके भीतर का सारा दुःख मानो पत्थर बन जाता है। अंततः पुत्र-वियोग की असहनीय पीड़ा सह न पाने के कारण वह घर के बाहर बैठी-बैठी प्राण त्याग देती है।

कहानी का उद्देश्य

यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों के त्याग, मातृबलिदान और अंग्रेज़ी शासन की कठोरता को उजागर करती है। लेखक ने दिखाया है कि स्वतंत्रता केवल क्रांतिकारियों के बलिदान से नहीं, बल्कि उनकी माताओं के अनकहे त्याग और पीड़ा से भी प्राप्त हुई है।

मुख्य संदेश

  • मातृत्व का सर्वोच्च त्याग और प्रेम।
  • देशभक्ति एवं स्वतंत्रता के लिए बलिदान का महत्व।
  • औपनिवेशिक शासन की दमनकारी नीतियों की आलोचना।
  • क्रांतिकारियों के प्रति समाज के भय और उदासीनता का चित्रण।

‘उसकी माँ’ केवल एक माँ की कथा नहीं, बल्कि उन असंख्य भारतीय माताओं को श्रद्धांजलि है जिन्होंने अपने पुत्रों को देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान होते देखा।

‘उसकी माँ’ – महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. ‘उसकी माँ’ कहानी के लेखक कौन हैं?

उत्तर: ‘उसकी माँ’ कहानी के लेखक पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ हैं।


2. कहानी का मुख्य पात्र कौन है?

उत्तर: कहानी का मुख्य पात्र लाल है, जो एक युवा क्रांतिकारी है। उसकी माँ जानकी भी कहानी का प्रमुख पात्र है।


3. लाल की माँ का नाम क्या था?

उत्तर: लाल की माँ का नाम जानकी था।


4. पुलिस सुपरिंटेंडेंट कथावाचक से किसके बारे में पूछताछ करता है?

उत्तर: पुलिस सुपरिंटेंडेंट लाल के बारे में पूछताछ करता है।


5. लाल के पिता कौन थे?

उत्तर: लाल के पिता रामनाथ थे, जो कथावाचक की जमींदारी के मुख्य मैनेजर थे।


6. लाल का स्वभाव कैसा था?

उत्तर: लाल साहसी, तेजस्वी, देशभक्त और क्रांतिकारी विचारों वाला युवक था।


7. लाल अंग्रेज़ी शासन के बारे में क्या सोचता था?

उत्तर: लाल अंग्रेज़ी शासन को अन्यायपूर्ण, शोषणकारी और दमनकारी मानता था तथा उसका विरोध करता था।


8. जानकी अपने बेटे और उसके मित्रों के साथ कैसा व्यवहार करती थी?

उत्तर: जानकी उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करती थी और उनके लिए भोजन बनाकर खिलाती थी।


9. लड़कों ने जानकी की तुलना किससे की थी?

उत्तर: लड़कों ने जानकी की तुलना भारत माता से की थी।


10. पुलिस को लाल के घर से क्या मिला?

उत्तर: पुलिस को लाल के घर से पिस्तौल, कारतूस और क्रांतिकारी पत्र मिले।


11. लाल और उसके साथियों पर कौन-कौन से आरोप लगाए गए?

उत्तर: उन पर षड्यंत्र, विद्रोह, हत्या और सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बनाने के आरोप लगाए गए।


12. जानकी अपने बेटे के लिए क्या-क्या त्याग करती है?

उत्तर: जानकी अपने गहने, बर्तन और घरेलू सामान बेचकर जेल में बंद लड़कों के लिए भोजन पहुँचाती है और उनकी पैरवी के लिए प्रयास करती है।


13. अदालत ने लाल को क्या सजा दी?

उत्तर: अदालत ने लाल को फाँसी की सजा दी।


14. फाँसी की सजा सुनने के बाद लाल का व्यवहार कैसा था?

उत्तर: लाल निडर और प्रसन्न दिखाई देता है। वह अपनी माँ को सांत्वना देता है।


15. लाल ने अपनी अंतिम चिट्ठी में क्या लिखा?

उत्तर: लाल ने लिखा कि मृत्यु के बाद भी वह अपनी माँ से अलग नहीं होगा और वे पुनः मिलेंगे।


16. जानकी की मृत्यु कैसे हुई?

उत्तर: पुत्र-वियोग के दुःख और मानसिक आघात के कारण जानकी अपने घर के बाहर बैठी-बैठी प्राण त्याग देती है।


17. कहानी का शीर्षक ‘उसकी माँ’ क्यों रखा गया है?

उत्तर: क्योंकि कहानी का केंद्र बिंदु लाल की माँ जानकी का त्याग, ममता और पुत्र-प्रेम है।


18. कहानी में अंग्रेज़ी शासन का कौन-सा रूप दिखाई देता है?

उत्तर: अंग्रेज़ी शासन का दमनकारी, क्रूर और शोषणकारी रूप दिखाई देता है।


19. ‘उसकी माँ’ कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: स्वतंत्रता केवल क्रांतिकारियों के बलिदान से नहीं, बल्कि उनकी माताओं के त्याग और पीड़ा से भी प्राप्त हुई है।


20. कहानी में मातृत्व का कौन-सा रूप चित्रित हुआ है?

उत्तर: निस्वार्थ प्रेम, त्याग, समर्पण और असीम वात्सल्य का आदर्श रूप चित्रित हुआ है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. जानकी के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:
जानकी एक आदर्श भारतीय माँ है। वह सरल, भोली, ममतामयी, त्यागमयी और सहनशील है। वह अपने बेटे लाल तथा उसके मित्रों को समान स्नेह देती है। पुत्र के जेल जाने पर भी वह उसके लिए भोजन पहुँचाती है और उसके निर्दोष होने का विश्वास बनाए रखती है। अंततः पुत्र-वियोग सहन न कर पाने के कारण उसका जीवन समाप्त हो जाता है।


2. ‘उसकी माँ’ कहानी में देशभक्ति की भावना किस प्रकार व्यक्त हुई है?

उत्तर:
कहानी में लाल और उसके साथी देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहते हैं। वे अंग्रेज़ी शासन का विरोध करते हैं और फाँसी की सजा मिलने पर भी विचलित नहीं होते। उनका साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम देशभक्ति की भावना को व्यक्त करता है।


3. कहानी के आधार पर लाल का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर:
लाल एक शिक्षित, साहसी, निर्भीक और देशभक्त युवक है। वह अंग्रेज़ी शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों का विरोध करता है। उसके विचार क्रांतिकारी हैं और वह राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखता है। फाँसी का सामना भी वह मुस्कुराते हुए करता है। उसके चरित्र में त्याग, साहस और आदर्शवाद के गुण दिखाई देते हैं।


परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण पंक्तियाँ

“हम मिले थे, मिले हैं, मिलेंगे।”
— यह पंक्ति लाल के अटूट मातृप्रेम, आत्मविश्वास और बलिदान की भावना को व्यक्त करती है।

“माँ! तू भी जल्द वहीं आना, जहाँ हम लोग जा रहे हैं।”
— यह कथन स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों की निर्भीकता को दर्शाता है।

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