Subscribe Us

लेबल

रविवार, 14 जून 2026

दूसरा देवदास

 'दूसरा देवदास' ममता कालिया की एक रोचक और संवेदनशील कहानी है, जिसमें युवा मन की सहज प्रेमानुभूति, संकोच, आकर्षण और भावनात्मक उथल-पुथल का सुंदर चित्रण किया गया है।

कहानी का नायक संभव अपने माता-पिता के कहने पर हरिद्वार आया है। वह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा एक आधुनिक शिक्षित युवक है। हरिद्वार में वह अपनी नानी के घर ठहरा हुआ है। एक दिन वह हर की पौड़ी पर गंगा स्नान और संध्या आरती देखने जाता है। वहाँ गंगा आरती का भव्य और आध्यात्मिक वातावरण उसे आकर्षित करता है।

आरती के बाद वह एक छोटे मंदिर में दर्शन करने जाता है। उसी समय एक सुंदर, श्यामल और भीगे वस्त्रों वाली युवती भी वहाँ पहुँचती है। दोनों संयोगवश एक-दूसरे के निकट खड़े होते हैं। मंदिर का पुजारी उन्हें पति-पत्नी या युगल समझकर आशीर्वाद देता है—"सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना।" इस अप्रत्याशित आशीर्वाद से दोनों संकोच में पड़ जाते हैं और बिना कुछ कहे अलग हो जाते हैं।

यह छोटी-सी घटना संभव के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। वह रात भर उसी युवती के बारे में सोचता रहता है। अगले दिन वह पुनः हर की पौड़ी और बाद में मंसा देवी मंदिर जाता है। वहाँ संयोगवश उसकी मुलाकात एक बालक मन्नू से होती है। बाद में रोपवे से लौटते समय उसे पता चलता है कि वही युवती मन्नू की बुआ है।

मन्नू दोनों का परिचय कराता है। युवती का नाम पारो है। उसका नाम सुनकर संभव को प्रसिद्ध उपन्यास देवदास की पारो की याद आ जाती है। वह हँसते हुए स्वयं को "देवदास" कह देता है। इस प्रकार कहानी एक मधुर और आशावादी मोड़ पर समाप्त होती है।

कहानी में हरिद्वार की धार्मिक आस्था, गंगा आरती का अलौकिक वातावरण, युवा मन की प्रथम प्रेमानुभूति तथा संयोग की भूमिका का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। शीर्षक "दूसरा देवदास" इसलिए सार्थक है क्योंकि यहाँ भी देवदास और पारो जैसे नाम सामने आते हैं, किंतु यह कथा निराशा नहीं बल्कि संभावनाओं, आशा और जीवन की सकारात्मकता का संदेश देती है।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. हर की पौड़ी पर आरती का दृश्य कैसा था?
  2. संभव हरिद्वार क्यों आया था?
  3. मंगल पंडा ने संभव से क्या कहा?
  4. पुजारी ने संभव और युवती को कौन-सा आशीर्वाद दिया?
  5. लड़की का नाम क्या था?
  6. मन्नू का पारो से क्या संबंध था?
  7. संभव को युवती पहली बार कहाँ दिखाई दी?
  8. मंसा देवी मंदिर तक पहुँचने के लिए संभव ने किस साधन का उपयोग किया?
  9. संभव किस परीक्षा की तैयारी कर रहा था?
  10. कहानी का शीर्षक "दूसरा देवदास" क्यों रखा गया है?

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. हर की पौड़ी की संध्या आरती का चित्रण अपने शब्दों में कीजिए।
  2. पुजारी द्वारा दिए गए आशीर्वाद से संभव और युवती क्यों संकोच में पड़ गए?
  3. संभव के मन में युवती के प्रति आकर्षण कैसे उत्पन्न हुआ?
  4. बैसाखी के अवसर पर हरिद्वार की भीड़ की क्या विशेषताएँ थीं?
  5. मंसा देवी मंदिर में मनोकामना की गाँठ बाँधने का क्या सांकेतिक महत्व है?
  6. संभव के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  7. नानी और संभव के संबंधों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  8. कहानी में हरिद्वार के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण का चित्रण कैसे हुआ है?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. "दूसरा देवदास" कहानी में प्रेम की प्रथम अनुभूति का चित्रण कीजिए।
  2. हरिद्वार के परिवेश का कहानी में क्या महत्व है? स्पष्ट कीजिए।
  3. संभव के मनोभावों का विश्लेषण कीजिए।
  4. कहानी के शीर्षक "दूसरा देवदास" की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
  5. ममता कालिया ने कहानी में आधुनिक युवा मनोविज्ञान को किस प्रकार प्रस्तुत किया है?
  6. धार्मिक आस्था और मानवीय भावनाओं के समन्वय पर टिप्पणी कीजिए।

महत्त्वपूर्ण चरित्र-चित्रण

  1. संभव का चरित्र-चित्रण।
  2. पारो का चरित्र-चित्रण।
  3. नानी का चरित्र-चित्रण।
  4. मन्नू का चरित्र-चित्रण।

परीक्षा हेतु संभावित उद्धरण-व्याख्या

  1. "सुखी रहो, फूलो-फलो, जब भी आओ साथ ही आना।"
  2. "मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है।"
  3. "इस भीड़ में एकसूत्रता थी।"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Pinned Post

उसकी माँ

    लेखक : पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ सारांश ‘उसकी माँ’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित एक अत्यंत मार्मिक कहानी है। इसमें ए...