Subscribe Us

लेबल

गुरुवार, 18 जून 2026

गुंडा

जयशंकर प्रसाद

अरुण यह मधुमय देश हमारा।

 

अरुण यह मधुमय देश हमारा।

जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिल
ता एक सहारा।।

सरस तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।।
लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
बरसाती आँखों के बादल, बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकरातीं अनन्त की, पाकर जहाँ किनारा।।
हेम कुम्भ ले उषा सवेरे, भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मंदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा।।

Pinned Post

‘War and Peace’ (वॉर एंड पीस) : एक विस्तृत पुस्तक समीक्ष

  पुस्तक परिचय War and Peace विश्व साहित्य की सबसे महान कृतियों में गिनी जाती है। इसके लेखक Leo Tolstoy हैं, जिन्हें रूसी साहित्य का शिखर ...