शिक्षा का उत्सव
भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है । मनुष्य अपने भावों की अभियक्ति के लिए जिस वाचिक माध्यम का प्रयोग करता है, वह भाषा है। यह मनुष्य की जरूरतों के अनुसार परिवर्तित और विकसित होती रही है। इसलिए यह बताना मुश्किल है कि भाषा की शुरुआत कब और कैसे हुई।
भारत में भाषा का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ लिखित भाषा का सबसे पुराना साक्ष्य (Evidence) सिंधुघाटी सभ्यता से मिलता है । इसे अब तक पढ़ा नहीं जा सका है। संस्कृत भारत की सबसे पुरानी भाषा मानी जाती है । भाषा वैज्ञानिकों ने इसका संबंध भारोपीय भाषापरिवार से माना है। इस परिवार को आर्य भाषा परिवार भी कहते हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा भाषा परिवार है। संस्कृत, जर्मन, फ्रैंच, ग्रीक, लैटिन, अँग्रेजी, स्पेनिश, रुसी, ईरानी – जैसी विश्व की अनेक भाषाओं का संबंध इसी परिवार से है। भारत-ईरानी परिवार इसी परिवार की एक मुख्य शाखा है। संस्कृत और ऑवेस्ता इस परिवार की मुख्य भाषाएँ हैं। आगे चलकर भारतीय और ईरानी भाषाएँ अलग हो गईं । हिंदी का संबंध इन भारतीय आर्य भाषाओं से है।
सोपानों में माना जाता है—
संस्कृत को देववाणी (देवभाषा) कहा जाता है। भारत के प्राचीन (पुराने) साहित्य की भाषा संस्कृत है। वैदिक संस्कृत में वेद लिखे गए जो विश्व का सबसे पुराना साहित्य है । रामायण, महाभारत और पुराणों की भाषा लौकिक संस्कृत है।
1. शौरशेनी- पश्चिमी हिंदी, पहाड़ी हिंदी (कुमाउँनी, गढ़वाली), राजस्थानी, गुजराती,2. अर्द्ध मागधी- पूर्वी हिंदी3. मागधी- बंगला, उड़िया, असमिया, बिहारी हिंदी4. महाराष्ट्री- मराठी ।5. ब्राचड़- सिंधी।6. पैशाची- पंजाबी
अपभ्रंश की इन्हीं शाखाओं से आधुनिक भारतीय भाषाओं का जन्म हुआ।