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2024

ललित निबंधकार कुबेरनाथ राय

हिंदी साहित्य की परम्परा में कुबेरनाथ राय की गणना आचार्य   हजारी प्रसाद साथ ललित-निबंध-त्रयी के रूप में होती है . किंतु, केवल इतना कहना उनके भरतीय …

हिंदी साहित्य का आरंभ और आदिकाल

हिंदी साहित्य का आरंभ और आदिकाल हिंदी साहित्य का आरंभ: हिंदी साहित्य की शुरुआत का समय निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसे लगभग सन् 1000 ई. …

हिंदी साहित्य का मध्यकाल (सन् 1318 ई. से 1643 ई.) और भक्ति काव्य

मध्यकाल (सन् 1318 ई. से 1643 ई.) और भक्ति काल मध्यकाल का परिचय: मध्यकाल, आदिकाल और आधुनिक काल के बीच का कालखंड है। इसे दो भागों में विभाजित किया गय…

भाषा का विकास और भारतीय भाषाओं का इतिहास

भाषा का विकास और भारतीय भाषाओं का इतिहास भाषा, मनुष्य के विचारों, भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करने का एक प्रमुख साधन है। यह समय के साथ विकसित और प…

हिंदी भाषा और उसकी उपभाषाएँ

हिंदी भाषा और उसकी उपभाषाएँ परिचय: हिंदी मध्य भारत की सामान्य बातचीत की भाषा है, जिसका विकास मध्यकालीन आर्य-भाषा अपभ्रंश से हुआ है। हिंदी के बोली …

हिंदी भाषा का विकास और स्वरूप

हिंदी भाषा का विकास और इतिहास 1. हिंदी भाषा का अर्थ हिंदी का शब्दार्थ है "हिंद की भाषा", जो भारत देश के नाम से जुड़ा हुआ है। "हिंद&q…

पुष्टि मार्ग और सूरदास

पुष्टि मार्ग का संबंध सूरदास के कृष्ण भक्ति के मार्ग से है। पुष्टि मार्ग विशेष रूप से वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था, और सूरदास इस मार्ग…

हिंदी साहित्य में ‘नयी कविता’

भारतीय काव्य साहित्य में ‘नयी कविता’ एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ के रूप में उभरी। यह कविता एक ऐसी काव्य धारा है, जिसने अपने समय की सामाजिक, राजनी…

कबीर: भारतीय लोकमानस के अनन्य कवि

कबीर भारतीय साहित्य और समाज के ऐसे विलक्षण कवि थे जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से न केवल आध्यात्मिकता को अभिव्यक्त किया, बल्कि सामाजिक विषमताओं…

सत्यशोधक समाज (The Society of Truth Seekers)

सत्यशोधक समाज (The Society of Truth Seekers) महात्मा ज्योतिराव फुले द्वारा 24 सितंबर 1873 को स्थापित एक संगठन था। इसका उद्देश्य समाज में व्याप्त ज…

ज्योति बा फुले

ज्योतिराव गोविंदराव फुले (1827-1890) भारतीय समाज सुधारक, विचारक, लेखक और क्रांतिकारी थे। उन्हें "महात्मा फुले" के नाम से भी जाना जाता है। व…

हरिवंश राय बच्चन का काव्य

हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के उन महान कवियों में से एक हैं जिन्होंने हिंदी कविता को एक नई दिशा दी। उनके काव्य में सरल भाषा, प्रतीकात्मकता और गहन …

कुटज

प्रकृति का सौंदर्य और उसकी अतुलनीयता हमेशा से मानव को प्रेरित करती आई है। हिमालय, पर्वतराज, न केवल अपनी ऊँचाई और विशालता के लिए जाना जाता है, बल्कि इ…

जहाँ कोई वापसी नहीं

निर्मल वर्मा का निबंध "जहाँ कोई वापसी नहीं" उनके गहन आत्मीय चिंतन और मानव अस्तित्व की जटिलताओं का सुंदर उदाहरण है। यह निबंध न केवल उनकी स…

निर्मल वर्मा

निर्मल वर्मा हिंदी साहित्य के प्रमुख निबंधकार, कथाकार और उपन्यासकार थे। उनके निबंधों में विचार, संवेदना, और गहन साहित्यिक दृष्टि का अद्भुत समावेश है…

अलंकार

अलंकार (Alankara) का अर्थ है "आभूषण"। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है और साहित्य तथा काव्यशास्त्र में इसका उपयोग काव्य को सुंदर, आकर्षक और …

तत्पुरुष समास

तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas) वह समास है, जिसमें पहला शब्द दूसरे शब्द का विशेषण होता है यानी पहले शब्द का दूसरा शब्द की विशेषता बताता है। इस सम…

समास

समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाया जाता है। यह नए शब्द का अर्थ उन सभी शब्दों क…

लागेउ माँह परै अब पाला। बिरह काल भएड जड़काला। पहल पहल तन रुई जो झाँपै। हहलि हहलि अधिकौ हिय काँँ।। आई सूर होइ तपु रे नाहाँ। तेहि बिनु जाड़ न छूटै मा…
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